अब घर बैठे जानिए कृषि से जुड़ी जानकारी

By | May 9, 2018


मंडी, हंसराज सैनी। देश के करोड़ों किसानों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन, मौसम, मृदा, बीज, खाद, कीटनाशक व मार्केट के उतार-चढ़ाव से संबंधित जानकारी समय-समय पर न मिलने से किसानों के लिए कृषि घाटे का सौदा बनती जा रही है। नतीजतन छोटे व सीमांत किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

जलवायु, मौसम व बीज आदि से जुड़ी जानकारी लेने के लिए किसानों को कभी कृषि तो कभी मौसम विभाग के कार्यालयों के चक्कर काटना पड़ते हैं। लेकिन निकट भविष्य में किसानों को अब हर तरह की जानकारी एक छत के नीचे मिलेगी। बारिश कब होगी, मृदा की स्थिति, जलवायु परिवर्तन, कौन सा बीज बिजाई के लिए उपयुक्त है और रासायनिक व जैविक खाद का कब-कब उपयोग करना चाहिए, ये जानकारी किसानों को घर बैठे मिलेगी। इतना ही नहीं कृषि को लाभप्रद बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कैसे हो सकता है?

स्मार्ट कृषि, किसान जोन के तहत इंटरनेट के माध्यम से इसकी पूरी जानकारी मिलेगी। केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी को स्मार्ट कृषि, किसान जोन स्थापित करने का जिम्मा सौंपा है। इस पर करीब 9.47 करोड़ रुपये खर्च होंगे। स्कूल ऑफ कंप्यू¨टग एंड इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ बेसिक साइंस व मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान स्कूल विशेषज्ञ इस प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। केंद्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान, ब्रिटेन व अमेरिका के कृषि विशेषज्ञ भी आइआइटी के विशेषज्ञों की मदद करेंगे।

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किसान जोन के तहत विशेषज्ञ देशभर के किसानों से संबंधित समस्याओं का डाटा एकत्र करेंगे। उन समस्याओं का कृषि प्रौद्योगिकी के माध्यम से निराकरण करेंगे। किसानों को मौसम, जलवायु परिवर्तन, बीज, खाद से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए एक वेबसाइट विकसित होगी। इससे हर संबंधित क्षेत्र के मौसम, जलवायु, मृदा की जानकारी उपलब्ध रहेगी। किस क्षेत्र में किस किस्म का बीज बिजाई के लिए उपयुक्त रहेगा। कब-कब खाद का उपयोग करना है। जलवायु परिवर्तन से फसल को क्या-क्या नुकसान हो सकता है? उससे निपटने के लिए क्या उपाय समय रहते किए जा सकते हैं? यह सब जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। इसके आधार पर किसान फसल की पैदावार कर सकते हैं।

स्मार्ट कृषि व किसान जोन स्थापित करने के लिए आइआइटी मंडी को जैव प्रौद्योगिकी मंत्रालय से 9.47 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला है। किसानों को अब जलवायु, मौसम, बीज, खाद व कृषि से संबंधित जानकारी एक छत के नीचे मिलेगी। -प्रो. टिमोथी ए गोंजाल्वेस, निदेशक, आइआइटी मंडी।

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