RBI ने चेताया- इन ‘बैंकों’ में पैसे न लगाएं, वरना होगा नुकसान

By | September 6, 2018
आम आदमी बैंक में पैसा रखना सबसे ज्यादा सुरक्ष‍ित मानता है. लेक‍िन कुछ ऐसे लोग हैं जो को-ऑपरेटिव सोसायटी को बैंक बता कर आम लोगों से डीलिंग करते हैं. ऐसे लोगों और संस्थानों को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही चेता चुका है.
भारतीय रिजर्व बैंक ने 29 नवंबर, 2017 को एक सर्कुलर जारी किया था. सर्कुलर के मुताबिक कुछ को-ऑपरेटिव सोसायटी खुद के नाम के साथ ‘बैंक’ शब्द का इस्तेमाल कर रही हैं. जो कि सरासर कानून का उल्लंघन है.
आरबीआई ने इस सर्कुलर में आम आदमी को हिदायत दी है कि वह ऐसी किसी भी को-ऑपरेटिव सोसायटी से बैंक के तौर पर लेन-देन करने से बचे. क्योंकि अगर आप ने किया तो आपको नुकसान हो सकता है.
केंद्रीय बैंक ने अपने सर्कुलर में कहा, ”आरबीआई के संज्ञान में आया है कि कुछ को-ऑपरेटिव सोसायटी अपने नाम के साथ ‘बैंक’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह ‘बैंक‍िंग रेग्युलेशन एक्ट, 1949 का उल्लंघन है.”
केंद्रीय बैंक ने आम लोगों से कहा है कि इन को-ऑपरेटिव सोसायटीज को उसकी तरफ से कोई अप्रूवल नहीं मिला है. आरबीआई ने कहा है कि इनमें पैसे लगाने से आपको नुकसान हो सकता है.
ये होगा नुकसान: उसके मुताबिक इन सोसायटीज में अगर बैंक समझ कर पैसा लगाते हैं, तो आपको बैंक डिपोजिट पर मिलने वाले इंश्योरेंस का फायदा नहीं मिलेगा. दरअसल डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) की तरफ से 1 लाख रुपये तक की रकम को इंश्योर किया जाता है.
ऐसे उठाते हैं बेजा फायदा: दरअसल बैंक‍िंग रेग्युलेशन एक्ट में को-ऑपरेटिव बैंक को ही सिर्फ बैंक का नाम इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है. इसमें साफ लिखा गया है कि को-ऑपरेटिव सोसायटी ‘बैंक’ नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकते. लेकिन नाम में काफी ज्यादा समानता होने की वजह से कुछ को-ऑपरेटिव सोसायटी खुद को बैंक बताते हैं. (सभी फोटो प्रतीकात्मक)
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