आप भी एलोवेरा की खेती कर हर साल कमा सकते हैं लाखों रु.

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न्यूज डेस्क। एलोवेरा की डिमांड लगातार बढ़ रही है। अब एलोवेरा किसानों के लिए एक मुनाफे वाला सौदा है। इसकी खेती कर लाखों रुपए की कमाई की जा सकती है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसानों को कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट कर खेती करना चाहिए और पत्तियों की जगह एलोवेरा का पल्प (गूदा) बेचना चाहिए क्योंकि पल्प को बेचने से ज्यादा कमाई होती है।

पिछले 25 सालों गुजरात में एलोवेरा की खेती करने वाले हरसुख भाई पटेल ने मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि, एलोवेरा की 1 एकड़ खेती से आसानी से 5 से 7 लाख रुपए कमाए जा सकते हैं। अभी बाबा रामदेव की पतंजलि सहित कई कंपनियां एलोवेरा खरीद रही हैं।

4 से 7 रुपए किलो में बिकती हैं पत्तियां
एलोवेरा की पत्तियां 4 से 7 रुपए किलो तक बिक जाती हैं। हालांकि यह कॉन्ट्रैक्ट पर भी डिपेंड करता है। वहीं पल्प 20 से 30 रुपए किलो बिकता है। एक एकड़ में करीब 16 हजार पौधे लगाए जाते हैं। एक्सपर्ट 8 से 18 महीने में पहली कटाई करने की एडवाइज देते हैं।

कैसे करें खेती
– एलोवेरा रेतीली मिट्टी और गर्म तापमान वाले क्षेत्र में तेजी से बढ़ता है। इसमें ज्यादा पानी की जरूरत भी नहीं होती।
– इसलिए इसे लगाने के लिए ऐसी जमीन देखें जहां पानी और नमी नहीं हो। भूमि थोड़ी ऊंचाई पर भी होना चाहिए। जिससे बारिश का पानी वहां न भराए।

– मानसून के पहले खेत को जोतना सही होता है। एक बार जोतने के बाद 12-15 टन खाद मिलाकर दोबारा भी जोतना चाहिए।
– गोबर की खाद के साथ में यूरिया, फास्फोरस, पोटाश भी समान रूप से डालना चाहिए। इसके बाद खेत में 50×50 सेमी. की दूरी पर पर क्यारी बना लें।

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– पौधों को किसी भी वक्त रोप सकते हैं, हालांकि ज्यादा अच्छा समय जून-जुलाई का होता है।

3 साल तक ले सकते हैं फसल, देखिए अगली स्लाइड में…

3 साल तक ले सकते हैं फसल

– एक बार प्लांटेशन करने के बाद आप 3 साल तक की इसकी फसल ले सकते हैं। IEC111271, IEC111269 और एएल-1 हाईब्रिड

प्रजाति के एलोवेरा को देश के हर क्षेत्र में उगाया जा सकता है।

– इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च (आईसीएआर) के अनुसार एक हेक्‍टेयर में प्‍लांटेशन का खर्च लगभग 27500 रुपए आता है। जबकि, मजदूरी, खेत तैयारी, खाद आदि जोड़कर पहले साल यह खर्च 50000 रुपए पहुंच जाता है।

– सालभर में इसे 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है। सिंचाई के लिए आप ड्रिप या स्प्रिकलर प्रणाली अपना सकते हैं। गर्मी के दिनों

में 25 दिनों के अंतराल में सिंचाई करना चाहिए।

पहले ठोस पत्तों की कटाई करें

– यह फसल एक साल बाद काटने के लिए तैयार हो जाती है। हमेशा पौधों की निचली ठोस पत्तों की कटाई पहले करें। ऊपर की नाजुक

पत्तियों की कटाई न करें।

– कटे हुए पत्तों में नई पत्तियां दोबारा बनना शुरू हो जाती हैं। प्रति हेक्टेयर 50 से 60 टन पत्तियां सालभर में मिल जाती हैं।

– मोटी पत्तियों की देश की विभिन्‍न मंडियों में कीमत लगभग 2000 से 2500 रुपए प्रति टन होती है।

– दूसरे साल में 15 से 20 प्रतिशत पत्तियां ज्यादा मिलती हैं। हालांकि इसके बाद प्रोडक्शन में गिरावट आती है।

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